समर्पित

जनम मेरा जननी को समर्पित
मृत्यू मेरी अमृत को अर्पित

जीन हाथो ने सम्भाला मुझको
हयात उन्हीं हाथो को समर्पित

जीन कदमों ने चलना सिखाया
कमल उन्ही कदमों को समर्पित

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)

3 Comments

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 15/10/2014
    • डॉ. रविपाल भारशंकर डॉ. रविपाल भारशंकर 16/10/2014
  2. kavikaushik09 16/10/2014

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