फिर कब मिलोगे

जाने कहाँ फिर, मुलाक़ात हो
जाने कहाँ फिर, मिले ना मिले
फिर कब मिलोगे, बताओ मुझे
हर वक्त हमेशा, याद आओगे

तुम्हारी तरह, मैं भी आया यहाँ
तुमसे मिला, ज्ञान पाया यहाँ
ये पीठ मेरे जीवन में, काम आयेगा
तुम्हारा मुझे, याद नाम आयेगा

कर्ज चुकता नहीं, इल्म का पर कभी
फर्ज चुकता करू, इल्म का मैं कभी
दुअा दो हमेशा मैं, आगे बढू
पढू इस कदर, जग में नेकी गढू

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)

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