राजनीति को इस धरती से, दफा कर दो

है नहीं, हो रहा है
इंसान लाशे ढो रहा है
हांक रहे हैं धर्मो- मजहब के ठेकेदार
सत्ता के लिए सब हो रहा है
एक जरुरी काम है
बस इतना अता कर दो
राजनीति को इस धरती से दफा कर दो
वरना ये धरती भस्म हो जायेगी
जिन्दगी जहाँ से खत्म हो जाएगी
फिर ना होंगे फूल, और ना होंगे पंछी
कर रहा हूँ बात तुमसे, आज मेरे मन की
एक जरुरी काम है
बस इतना अता कर दो
राजनीति को इस धरती से, दफा कर दो

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)

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