मेरा प्रथमांकन-3

1-
आ सोचते हैं बैठकर
ये सोच भी क्या चीज है,
ये सोच चिता से है बड़ी
अपनी-अपनी सोच है।

2-
अजब-अनोखी दुनियां में
अजब-गजब के रिश्ते हैं,
अजब निराली बातें हैं
मीठे बोल न सस्ते हैं।

3-
अब नारी बड़ी सयानी है
झण्डा-बैनर ले चिल्लाती है,
अपने घर को उजाड़कर
दुनियां की खिल्ली उड़ाती है।

4-
मैं जिन्दगी में
अलग हूँ अकेला हूँ,
परमात्मा ने
जुल्म सहने को धकेला हूँ,
कयामत से मुझको
भला डर कैसा
इस किले का मैं
मालिक अकेला हूँ।

5-
कब रहा कोई बज्मे-गैर में
बगैर उनके,
खामोश रहता है आदमी
बगैर उनके,
नज्जारा-ए-आतिशे-दोज़ख
और मैं,
किसने पाई फुर्सत सर
उठाने की बगैर उनके।

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