मेरा प्रथमांकन-2

1-
यदि मुस्काओ मन ही मन तुम,
होंठ तुम्हारे कह देंगे,
आँखों से यदि छलका नीर,
सखी सह न सकेंगे पीर।

2-
सच तो ये है आज जमाने में,
जाम छलकते हैं मयखाने में,
गैर की पीर को भला कब,
सुना है दुनियां वालों ने।

3-
नारी नारी है,ना देवी है
पतिव्रता भी अरु झूठन भी,
परनार को देवी कहता है
झूठन उसको जो है देवी भी।

4-
गर्दन उठाकर जब-जब देखा
कुछ स्वार्थी कुछ बेजान दिखे,
उनसे अच्छे वो निकले जो
गम में दिखे बेहाल दिखे।

5-
साधु संत की अद्भुत वाणी
ज्ञान-जिव्हा म्रदुल-मंत्र,
माँ की कोख पिता की टोपी
रखो सलामत मेरे मित्र।

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