नशा बुरी चीज़

रख तुम्हे कोख में उस महान आत्मा ने ,
तुम्हे इस जग में जन्म दिया !

कितने सह दर्द कहती वो मीठे से थे ,
रखा संभाल तुम्हे नो महीने
कहती वो माँ कुछ ही पल थे ये !

नो माह तक उस ईस्वर से भी ज्यादा
उस माँ ने ही तुम्हारा ख्याल रखा
पर तुमने कर दिया सीस उसका ही नीचा आज !

था कोई भगत सिंह भी तो एक माँ का वीर पुत्र
रखी थी लाज उसने भी अपनी माँ और भारत माँ की
नशे से दूर बुरी संगत से दूर वो भी तो रहा था!

देश के भविस्य के लिए ही उसने हर दिन अपना जिया था
पर जवान आज २१ वर्ष का ही
नशे में धुत रह तुम माँ अपनी संग देश का दिल तोड़ रहे !

इसी ही उम्र में ही वीर भगत माँ की गोद में जा बसा था
फांसी को चुम वो जवान भी तो तुम जैसों के लिए जिया था
छोड़ दो नशा करना तुम भी दोस्तों!

निकाल दो इसका स्वाद कड़वा तुम अपने मन से
होता इससे केवल नुक्सान ही नुक्सान
किसी का बीटा मरता तो किसी बहन का भाई पागल हो जाता !

इसी का फायदा उठा कर
दुश्म अपने देश पर बुरी नज़र रखता
छोड़ दो त्याग दो तुम नसे को तुम नसे को !

– हरमीत शर्मा कवि

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