सत्यमेव जयते

सोई हुई है अज्ञान में
दास्तां इंसान की
बोई हुई है इस में हमने
नस्लें झूठे शान की
क्षण क्षण मिटे पल पल बीते
देख बुराई कोई न चेते
इतनी कटूता इतनी छलता
इस जमीन पर रहते
मिट्टी ही ना बंजर निकले
भारत वर्ष के रहते
सत्यमेव जयते

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)

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