॥ कुछ कुछ इश्क जैसा ॥

हमने पुछा एक दीन उनसे,
हम क्या है तुम्हारे लिए……
जो आप हमसे मोहोब्बत ना कर सके…..?
क्या मुकाम है हमारा, आप के खामोशी के आगे….
जो आप हम से गुफ्तगु ना कर सके….?

उन्होने मुस्कुरा के कहा,
“तु वक्त हे मेरे लिये, जो एक दिन गुजर जायेगा
इन खुशीयो की तरह”

“तु रेत हे मेरे लिये, जो हाथो से फिसल जाएगा,
मेरी वफाओ की तरह”

“तु मोम हे मेरे लिये जो एक दिन पिघल जाएगा,
मेरी अदाओ की तरह”

“तु दिया हे मेरे देहलिज का जो एक दिन बुझ जाएगा,
मेरी जिंदगी कि तरह”

“तु वो जित का मुकाम हे मेरे लिए जो एक दिन छीन लिया जाएगा,
मेरी सांसो और मेरी धड्कनो की तरह”

“मेरे कातील तु वो जिंदगी हे मेरी, जो मे कभी जी नही पाऊंगी,
मेरी इन ख्वायीशो की तरह”

“मै तुझसे मोहोब्बत ना कर पाउंगी, क्यों के…..?
तु अजीज हे मेरे लिये इक अफसाने की तरह,
और में मेखाना हु इश्क का जो तुझे मिटा देगा एक फसाने की तरह….।

– संदीप जगताप

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