मैंने पूछा ताजमहल से

मैंने पूछा ताजमहल से
क्या गम है तुझको
मुमताज का ताज,
वह बोला-
मैंने देखा न जिसे
उसके गम का
कैसा साज?
वाह-वाह सुनने को
बेताब
फनकार गुजर गया
वाह होगा,
जीते जी तो
बिसमिल्लाह का
सुना नहीं सियासत ने साज।

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