ग़ज़ल – ऐ गुनाहो के ख़ुदा..

ऐ गुनाहो के ख़ुदा मुझपे इतना करम कर दे
मेरे दिल को कोई दर्द दे मेरी आँखे नम कर दे

मेरे दिल को बड़ा नाज़ है तेरे वादें वफ़ा पे
अब न मिल मुझसे दूर वो सारे भरम कर दे

मेरे पलकों से आशना है तेरे ख़्वाब तमाम
अब आँखों के रहे सहे रिश्ते भी खत्म कर दे

हम तो तेरे शैदाई है इक ज़माने से सितमगर
किस वास्ते हम तुझसे ये मोहब्बत कम कर दें

दे वो दर्द मेरे रूह को रहे याद बस तू ही
न चाहते हुए भी मुझपे ये सितम कर दे

4 Comments

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 14/10/2014
    • Sandeep Singh "Nazar" 14/10/2014
  2. Sandeep Jagtap Sandeep Jagtap 17/10/2014
  3. Sandeep Singh "Nazar" 19/10/2014

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