प्रभु अब तो बुला ले

प्रभु अब तो बुला ले

पैरो में पड़ी है छाले
प्रभु अब तो बुला ले
आँखों में पड़ी है जाले
प्रभु अब तो बुला ले

गम की बोझ बड़ी है
अब तो सहारा छड़ी है
देखते नहीं हैं घर वाले
प्रभु अब तो बुला ले

आँगन हुआ परदेश
न आती कोई शंदेस
खुद पे मुझ को मिला ले
प्रभु अब तो बुला ले

बैठे हो कितने दूर
क्या तुम भी हो मजबूर ?
तोड़ दे जिंदगी के ताले
प्रभु अब तो बुला ले

साँसे रुक रुक चलती है
आँखों से गम बहती है
खुद भी तो आँशु बहा ले
प्रभु अब तो बुला ले

हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड
१२-१०-२०१४

8 Comments

  1. Sandeep Jagtap Sandeep Jagtap 12/10/2014
  2. Paudel Paudel 12/10/2014
    • Sandeep Jagtap Sandeep Jagtap 14/10/2014
      • Paudel Paudel 15/10/2014
  3. डी. के. निवातिया D K NIVAATIYAN 13/10/2014
    • Paudel Paudel 15/10/2014
  4. manoj charan manoj charan 14/10/2014
  5. Paudel Paudel 15/10/2014

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