।।अपना दिल।। (कविता)

*बस धडकेगा अपना दिल *

जब निकलेगा सुबह एक दिन
कर्मो का विज्ञापन
तब आयेगा याद तुम्हें भी
अपनो का अपनापन
तब पछताने
बिना बहाने
नही मिलेगी मंजिल ।।
बस धडकेगा अपना दिल ।।1।।

***

लम्हा लम्हा इस जीवन का
हैं तुमनें अजमाया
दुख के एक पलो का फिर भी
मजा नही हैं पाया
जब से आये
समय गवाये
टूट पडी हैं मुश्किल ।।
बस धड़केगा अपना दिल ।। 2।।

***

न जाने कितने अवसर थे
थी कितनी अजमाइश
पर सबको अनदेखा करके
की पूरी अपनी ख्वाहिश
गम की चाहत
मिली न राहत
नही बन सका काबिल ।।
बस धडकेगा अपना दिल ।। 3।।

***

चूँकि तुमने सुरू किया था
सबका दिल बहलाना
हुआ नसीब नहीं पर तुमकों
प्यार किसी का पाना
हँसी हसाकर
गम अपनाकर
काट रहे हो दुर्दिन ।।
बस धडकेगा अपना दिल ।। 4।।

***

इसीलिये अपनी यादों मे
अपनों की पहचान
कभी न भूलो करते रहना
पग पग पर एहसान
ताकि दूरी
रहे अधूरी
कहे न कोई कातिल ।।
बस धडकेगा अपना दिल ।। 5।।

***

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