बड़ी कक्षाओं में इम्तिहान ज़ुबानी नहीं होते

जुबान भी बड़ी अजब है
किसी की चल रही है तो
किसी की फिसल रही है
कुछ हैं जिनकी जुबान पर सिर्फ युद्ध है
तो किसी की जुबान पर सिर्फ वध है
कुछ हैं जो चाहते हैं सिर्फ वो जुबान चलायें
बाकी अपनी जुबान पर लगाम लगाएं
कोई है जो जमा-खर्च का ज़ुबानी हिसाब लेने में लगा है
सात दशकों के बही-खातों को ज़ुबानी जोड़ने में लगा है
किसी के पास जुबान नहीं कि उसे समझाये
ज़ुबानी जोड़-घटाने के सवालों के ज़ुबानी हल हमेशा सही नहीं होते
इसीलिये बड़ी कक्षाओं में इम्तिहान ज़ुबानी नहीं होते

अरुण कान्त शुक्ला
9 अक्टोबर’ 2014

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