‘राम भजने से दिल ना चुराना’

राम भजने से दिल ना चुराना।
इस जीवन का कोई ना ठिकाना॥
इ जीवन है सूखी लकड़िया।
अग्नि लगे से जलि जाना॥
इस जीवन का कोई ना ठिकाना।
इ जीवन है कागद की नैया।
इस जीवन का कोई ना ठिकाना।
राम भजने से दिल ना चुराना॥
हवा लगे उड़ि जाना।
इस जीवन का कोई ना ठिकाना॥
इ जीवन माटी का खिलौना।
बुंद पड़े गलि जाना॥
राम भजने से दिल ना चुराना।
इस जीवन का कोई ना ठिकाना॥

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