‘हरे राम-हरे कृष्ण’

आज भगवान मेरे मंदिर में बसना। हरे राम हरे कृष्ण बोल मन रटना॥ राम के प्रेम में सीता दिवानी। सीता के हाथों में गजरा निशानी॥ गजरा पहिरा सीता कर लिया अपना। हरे राम हरे कृष्ण बोल मन रटना॥

राम के प्रेम में मीरा दिवानी। मीरा के हाथों में वीणा निशानी॥ वीणा बजा मीरा कर लिया अपना। आज भगवान मेरे मंदिर में बसना। हरे राम हरे कृष्ण बोल मन रटना॥

राम के प्रेम में शबरी दिवानी। शबरी के हाथों में बेर निशानी॥ बेर खिलाके सबरी कर लिया अपना। हरे राम हरे कृष्ण बोल मन रटना॥ आज भगवान मेरे मंदिर में बसना। हरे राम हरे कृष्ण बोल मन रटना॥
शव्दार्थ:-शबरी-एक तपस्वनी,जो जाति की भीलनी थी। राम जब सीता के वियोग मेंव्यथित हो शबरी की कुटिया पर पहुचे तो स्वयं चख- चख खृ उसने जूठे मीठे बेर राम को खिलाया था। राम ने इसे नवधा भक्ति का उपदेश दिया था।(विनय-पत्रिकापृ0256टिप्पणी-2)। बेर-एक कटीला वृક્ષ जिसके फल को खाया जाता है। इसके कई भेद होते हैं।

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