हाय पैसा ! हाय पैसा !!

पैसा प्यार है, पैसा नफरत
दुश्मनी ये करवाता है l
बिन पैसे के इस दुनिया में
आदमी लाचार हो जाता है ll

जन्म लिया जब इस दुनिया में
तभी से पैसे की कीमत समझ पाया l
बिन अस्पताल का बिल भरे
तो डॉक्टर भी छुट्टी नहीं दे पाया ll

बचपन में साथ थे खेले
भाई -भाई से प्यार करे l
आज वहीं इस पैसे की खातिर
एक दूजे पे वार करे ll

ये है तेरा ये है मेरा
लोगों में अब यह समाया है l
हाय पैसा कैसी तूने फैलाई यह माया है l l

लड़की है लक्ष्मीं का रूप
लड़की ने घर बनाया है l
फ़िर भी लोगों ने पैसे की खातिर
इसे भी जिन्दा जलाया है ll

कहते है भूखे पेट उठाता है ईश्वर
किन्तु भूखा नहीं सुलाता है l
सच्चाई तो यह है की बिन पैसो के
यह भोजन भी नहीं आता है ll

पैसे की इस नगरी में
इन्सान की कीमत क्या होगी l
यहाँ मुजरिम तो बच जाता है
और बेगुन्हा को सजा होगी ll

एक दिन मरना सभी को है
किन्तु गरीब यह अफ़सोस मनाता l
अगर मेरे पास पैसा होता
तो शायद यह जिन्दा बच जाता ll

सब कुछ खरीद लेगा तू इस पैसे से
लेकिन सुख-शांति नहीं मिल पायेगी l
बिना नींद की गोली के
तुझे नींद कहाँ से आएगी ll

पैसा-पैसा करता इन्सान
तू यूँ ही मर जायेगा l
जीते जी आटे की रोटी
मरने के बाद दो गज़ ज़मीन ही पायेगा ll

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