ऐ! सुन्दरि

विश्वसनीय वेदनाहर, मूँगिया अधर पर मंद हास,
तिरछी चितवन ज्यों शल्य चिकित्सा को तत्पर,
न्यू शार्प ब्लेड ले शल्य चिकित्सक डटा हुआ है ड्युटी पर।
पस पड़ चुकी निराशा की कर देता बाहर।
ऐ! सुन्दरि, तू बोल, घोल नर्वाइन टॉनिक नस नस में।
जो सटकर बैठे तो हर ले ज्वर तन मन का।

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