करके मेरा खयाल वो

1-
करके मेरा खयाल वो
शरमा के रह गई,
उस दिन लगा कि मिल गई
मुझको मेरी मंजिल।

2-
आशिक खड़ा सामने
हुई निगाहें चार,
माशुक को यूँ लगा
जिन्दगी संवर गई।

3-
बादे-सितम ये कहा
करके हमारी याद,
तेरे बगैर न दर्द से
रिश्ता कोई रहा।

4-
चलना तेरा क्या गजब
आई बहार हो,
अगले जन्म का हमें
इंतजार हो गया।

5-
गिरा आँख से आँसू कि
शोला खाक हो जाए,
आदमी की आह को
पहचानती है क्या?

6-
लिख दिया लिखना नहीं
अब रसाइल में,
उपाधियां नीलाम हो
बिकने लगीं शहर में।

7-
दिल चुराकर कर गए
फिर वही सितम,
आधी-अधूरी आरजू
अधखिला गुलाबी रंग।

8-
उस मंजिल का कैसे
बयां हो कोई,
जिस मंजिल पे
मेहरबां हो कोई।

9-
करे गर कोई शिकायत
गैर से अपनी,
तो नहीं वो आदमी
अपनी महफिल का।

10-
करे गर खूं मसीहा तो
क्या शिला उसका,
दोस्ती में जां मेरी
निकाल देता है।

11-
तमन्ना न मेरी अब कोई
न मिलना मेरा सहल,
आरजू में मिल गई
मुझको मेरी मंजिल।

12-
तौबा तेरी हस्ती
मुबारक तुझको,
मुझको खुदा की
इबादत काफी।

शब्दार्थ-
1-रसाइल/पत्रिका
2-सहल/सहज

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