यही वो हुस्न जिसे

1-‘
यही वो हुस्न जिसे
इश्को-आब कहते थे,
अब इशारों पे किन्हीं
बेआबरू क्यों है?

2-
बसाकर याद में उसको
जो देखूं कारवाँ अपना,
तसल्ली दिल को होती है
हकीकत सामने कब हो?

3-
बनाकर दोस्त दुश्मन का
बदलाव देखा है,
फिर किसी जुल्फ का
बिखराव देखा है।

4-
क्या जुर्म नहीं कि
कहते हो करने को सलाम,
होती खुदाया तेरी रूह
तो मैं पढ़ता नमाज।

5-
जादू हम अगर देखें
दिखाएँ क्या मगर तुमको,
बाजुएं गर हमारी
थकने लगें तो क्या?

6-
ऐ इश्क न कह लगाने की
जिगर से उसको,
दर्द सैण्डिल का न
वर्षों जाएगा।

7-
हमने उठाए गम बहुत
लेकिन सितम फिर भी,
झुलझुलाकर रह गए
एक बेवकूफी पर।

8-
मालूम हमको जन्नत की
हकीकत लेकिन,
हम हैं कि राहे-मंजिल पे
कदम रखते हैं।

9-
हर हाल तमाशा करने वाले
हैरां हैं अफ़साने पर,
मदिरापानी पीकर गिरते
हँसते हैं मयखाने पर।

10-
करेंगे हम शिकायत तो कहोगे
आप क्या हमसे,
काश!हमारी चाल पे हक
आपका होता।

11-
जिन्दगी ये आखिर
किसने जुदा की,
सफर जिन्दगी का
ओ मंजिल खुदा की।

12-
जहाँ मिली जिस हाल में
खरीद ली शराब,
बोतल उठाकर पी गए
साहिब,शौक,जनाब।

One Response

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 07/10/2014

Leave a Reply