जीवन की सच्ची कहानी

जीवन की सच्ची कहानी,
अभी तक न भूल पायी जैसे कल की बात है हुई,
थे हम पाँच पढ़ाई करते हुए,
कक्षा में मज़ाक भी करते हुए,
फिर भी अच्छे दोस्त थे हम,
समय बिट गया,
दो साल बाद हम अलग हो गये,
दो साल बाद फिर मिले पर थे अब सिर्फ चार,
मन थे उदास ,
कक्षा में नये चेहरे,नये दोस्त कुछ थे ईर्षलु,कुछ थे अच्छे,
थी एक लड़की उस कक्षा में जिसने लिया मुझ मासूम का नाम,
जिसपर मेरी सहेलियों ने किया अधिक विश्वास और मुझे छोड़ दिया अकेलेपन की राहों पर,
मेरी सहेली की सगाइ होने वाली और मैं थी इस बात से अनजानी,
और उस लड़की ने लिया मेरा नाम और न सोचा उसका अंजाम कि मेरी सालों की दोस्ती समाप्त हो गयी,…
खाने पर बैठी एक शाम,किया एक दोस्त ने मुझे काँल और कहा….
“क्या भूल गई वो दिन जब तुम मेरी गाड़ी में सफर ,,,,,
मैं सोचती रही मैं ने कुछ नहीं कहा न खा सकी न अपने परिवार के आगे रोने लगी जिसको मैं मानती थी मैं बहन और उसके निजी जीवन के बारे में अनजान थी….
क्या यही है दोस्ती….??
कैसे भूल पायी वे सब मेरी दोस्ती और किसी अंजान लड़की पर करने लगीं वे सब विश्वास….
शायद हाँ..,,,
ऐसी होती है….
पैसों वाली लड़कियों की दोस्ती….
जो आज तक न भूल पायी,….
और जिसने लिया मेरा नाम और किया मुझे बदनाम……….

2 Comments

  1. Mukesh Sharma Mukesh Sharma 07/10/2014
  2. डॉ. रविपाल भारशंकर डॉ. रविपाल भारशंकर 19/10/2014

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