प्रेम से अलग

प्रेम से अलग की दुनिया??
कहना है तो बहुत आसान,
छोड़ तो दो उसे,
क्या करता है??ऐसा काम जो करे, तुम्हारे प्यार को बदनाम!
माँ-बाप कहे तो कैसी है ये दुनिया,
नहीं रह पाओगी उसके संग,
मुश्किल है बड़ा यह मेरे लिए कदम उठाना,
क्या कोई और कर सगेगा मुझसे ऐसे ही प्यार,
अपनी प्रेमी से जूदा होकर क्या आसान है रहना,??
क्यों देखते हैं ये हर समय जात-पात का मामला?
क्या मरने पर भी ईश्वर देखते हैं जात-पात??
है ईश्वर बंद कीजिए इस को, क्या देखागा ये ज़माना…………

2 Comments

  1. harish kumar 08/10/2014
  2. karishma karishma 08/10/2014

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