रात का समय

निहारती हुई….,
आसमान को आज शाम को,
देखती हुई ,बैठती हुई, इस सुन्दर सा आकाश जो,
इस सुन्नेहले पल को कहीं थम न जाए,
सूर्य को डूबती हूई….
देखती हुई मैं हैरान हुई ,
जो शायद करे हमें ढंग,
तो दूसरी ओर….पूर्णिमा देखती हुई मैं….रात का समय
हाँ,यहीं तो है खूदरत का करिश्मा……..

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  1. harish kumar 08/10/2014

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