तेरे दिए जख्म

जब भी मैं रो लेता हूँ
तेरे दिए जख्म सी लेता हूँ
जब भी तुम याद आते हो
ग़मों के ज़ाम चुपके से पी लेता हूँ
डर लगता जब तन्हाई से …
तेरी तस्वीर को सीने से लगा लेता हूँ
जब भी बात तेरी चले महफ़िल में
महफ़िल से रुखसत हो लेता हूँ
बिखरे यादों के मोती
सिने में फिर संजो लेता हूँ
दिल जब भी बेवफा करार देता तुझे
मैं दिल को अनसुना कर देता हूँ
छूट गए जो वादे अधूरे कहीं
उन्हें हर बार
मैं अपनी किस्मत मान लेता हूँ
रो लेता हूँ जब भी मैं ……………..
तेरे दिए जख्म सी लेता हूँ १
देशबन्धु ” टी .जी. टी. (आर्ट्स) हिमाचल शिक्षा विभाग
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