किधर जाऊँ किस बस्ती में प्रभु

किधर जाऊँ किस बस्ती में प्रभु,
राह दिखाओ चंद खुशी के लिए,
किसी भी रिश्ते से मिला दो कहीं,
जी सकूँ किसी जिन्दगी के लिए,
कहीं मुझको सहारा मिले तो सही,
स्वर्ग सा घर भी बसा दूंगी मैं,
तन्हा हूँ अकेली इक रिश्ते के लिए,
वक्त आने पर सौ रिश्ते बसा दूंगी मैं।

Leave a Reply