उम्र है खाली डब्बे सी

उम्र है खाली डब्बे सी
भरी है जिसमे ज़िन्दगी
रौशनी एक प्यारी सी
आती है ऐसे छन के
भीगी सी ओट हो
न कोई खोट हो
बरसे करम सर ढांके
बांका सा बनके
ज़िंदा हर पल
ज़िन्दगी बस तू चल

चुटकी चुटकी गटक जा
मिला के सारे हिस्से
ख़ुशी और ग़म के किस्से
बाँट ले तू सभी
भर ले तू ज़िन्दगी
उम्र के उस डब्बे में

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