‘वह सोचा सपने सब हैं?


जरा सम्हल कदीम कर डालो।
अमीरीका ज्यों ठाट सजालो॥

स्वच्छता की अलख जगादो।
भ्रष्टाचार का समूल मिटादो॥

राष्ट्रपिता की अलख जगादो।
कूड़ा-कचरा सारा साफ करादो।

शास्त्री जी को याद दिलादो॥
भारत को मिल-जुल जगादो॥

अधिकारों का જ્ઞાन फिर करादो।
स्व कर्तव्य का दान सिखलादो॥

औरों को वह गुर सिखलादो।
जीवन अपना सफल बनालो॥

सत्य को जीवन में अपनालो।
जांच परखकर उसे दिखलादो॥

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