स्वार्थ

तो चलो महसूस करें उन स्वार्थो को
और उनकी टकराहट को,
जिनसे ये दुनिया बनती रही है,…….
एक स्वार्थ प्रेम का, तो एक वासना का,
एक स्वार्थ भूख का, तो एक भूख की लूट का,
एक स्वार्थ जनता का, तो एक चुनिन्दा का …….
इन स्वार्थो मैं मेरा स्वार्थ क्या है ,
तो चुन लूं मैं एक स्वार्थ,जो दुनिया को सुंदर बनायें
और टकरा जाऊँ उस स्वार्थ से , जो झूट फरेब बैमानी सिखाये ……..

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