हजार दरवेश

वह अपने लंबे बालों को छाँट लेती है
पॄथ्वी से दूरी बना लेने का यह उसका तरीका है ।
उसे अपने रोजानामचे में शामिल करना है
आकाश के सितारों से मुठभेड़ की कथाएँ
वह इस ब्रह्माण्ड के बाहर कहीं रहेगी
अपना घर बनाकर ।
उसकी दीवारों पर लिखेगी अपनी मर्जी की
प्रेम कविताएँ
और ऐसे पढेगी जैसे वे पॄथ्वी पर पढ़ी जा रही हों ।
मुश्किल है प्रेम को कविताओं की तरह लिखना
चाहे हों दुनिया में जितने भी छापेखाने
बिना प्रेम करने की आजादी के स्त्रियाँ कैसे
लिख सकती हैं प्रेम कविताएँ
कयी जन्मों की उदासीनता तैरती है उसकी
आँखों में ।
ऐक्वेरियम की मछलियों की आँखें देखी है तुमने
पढ़ी हैं अपने समय की स्त्रियों की लिखी
डायरियां
जिसे उन्होंने दास्तानें पहने हुए हाथों से लिखा
कभी नहीं पढ़े जाने के लिए चाँद की रौशनी में
प्रेम कविताएँ नहीं लिखी गई हैं उनमें
प्रेम रचा गया है उनमें ब्रह्मा के पॄथ्वी की तरह ।
इन अक्षरों को पढना दुनिया के सबसे बङे साहस से गुजरना है
कविताओं में प्रेम एक फुनगी है विरल और कमजोर एक विशाल अश्वत्थ की
बहुत गहरे आईसबर्ग की नोक है प्रेम कविताओं में
तुम नहीं जानते हो और कोई नहीं जानता होगा
प्रेम की सबसे बङी क्रान्तियाँ अभी अँधेरे में हैं
दमन इतना भयानक कि हस्तलिखित महान
डायरियां हजारों सालों की खुदाई में नहीं मिली हैं
कभी जिन्हें दास्ताने पहने हाथों ने लिखा था
इसी पॄथ्वी पर चाँद की रौशनी में ।
वह कितना पुराना किंतु विश्वसनीय दिखाई पङती है यह सब बताते हुए
एकाध अक्षर चमकते हैं कभी-कभी उन राखों में
जो जलाए गये उन स्त्री देहों के साथ
दुनिया के हर देश में जहाँ प्रेम लिखना धर्म विरुद्ध था ,प्रेम करना भी
और प्रेम माँगना सबसे ज्यादा ।
वह कहती है कि उसने पढ़ा है जीवन की यातनाओं के स्वीकार से भरे एक अपवाद स्वरूप क्षणांश में
दुनिया की सबसे पुरानी औरत की मुस्कुराहट
ये अक्षर कोयले थे न जाने कितने हजार वर्ष पूर्व हीरे की तरह चमकते हैं आज भी उसकी
आँखों में
आज की रात भी दुनिया के सबसे प्राचीन अँधेरे में ।
उसने कहा तुम इस क्षण में महानतम हो
पॄथ्वी पर
लो औरत के प्रेम की वे कविताएँ पढो
जिसमें सबसे ऊँचे वॄक्षों की सबसे गहरी जङों का अँधेरा है
तुम इन साँवले उजालों को छू लो और उन हजार दरवेशों में हो जाओ
जो धरती के बनने से लेकर आज तक हुए हैं ।

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