यॅू तो इक नाजुक सी

यॅूं तो इक नाजुक सी फुलों की वो डाली है ………………
रचना :- अवधेश कुमार मिश्र रजत

यॅूं तो इक नाजुक सी फुलों की वो डाली है।
आँखों में उसकी ममता की अद्भूत लाली है।।
जब प्रेम करे तो राधा है प्रतिशोध करे तो पांचाली,
अंत सुनिश्चित है उसका बुरी नजर जिसने डाली।
स्नेहमयही है हृदय से क्रोध में वो माँ काली है।।

घर को पाले हमें सम्भाले कष्टों में भी मुस्काती है,
हर वार सहे खुद पर तुफानों से परिवार बचाती है।
उसके होने भर से घर की बगिया में हरियाली है।।

त्याग की मूरत है वो खुशियों की फुलवारी है,
ईश्वर की सबसे अद्भूत रचना तो ये नारी है।
प्रियतम है वो उसकी तो हर इक बात निराली है।।

हो चाहे कोई भी दुविधा इक पल में वो दूर करे,
हिम्मत ना कभी वो हारने दे जीने को मजबूर करे।
दे प्रेम रजत को वो नारी ही कवि बनाने वाली है।।

4 Comments

  1. Mukesh Sharma Mukesh Sharma 02/10/2014
  2. shivbhan singh 04/10/2014
  3. Rajeev Kumar Rao 05/10/2014
  4. PRADEEP KUMAR 09/10/2014

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