बेवफाई

तंग आकर उनकी बेवफाई से ……………………
रचना:- अवधेश कुमार मिश्र “रजत”

तंग आकर उनकी बेवफाई से
पीछा छुड़ा लिया मैंनें,
सर पर चढ़ कर जो बैठे थे उन्हें
आज जमीं पर गिरा दिया मैंने।
था बहूत उन्हें गुरूर खुद पर
इठलाते थे बलखाते थे,
जितना भी मैं मनाता उनको
वो उतना ही इतराते थे।
जब बिछड़ रहे थे वो मुझसे
आँखों को घुमा लिया मैंनें।
सर पर चढ़ कर जो बैठे थे उन्हें
आज जमीं पर गिरा दिया मैंने।।
बिन उनके यह सच है कि अब
विरान सा गुलशन लगता है,
सावन के महीने में भी अब तो
पतझड़ सा सबकुछ लगता है।
तोड़ बहारों से हर इक रिश्ता
खुदको तन्हा बना लिया मैंने।
सर पर चढ़ कर जो बैठे थे उन्हें
आज जमीं पर गिरा दिया मैंने।।
उम्मीद है वो फिर आयेंगें
सूनी बगिया को मेरी महकायेंगें,
पहले जैसे इसबार ना फिर वो
अपनी अदाओं से मुझे जलायेंगें।
वो थे रजत कभी सर के ताज मेरे
इसलिए उन्हें माफ किया मैंने।
सर पर चढ़ कर जो बैठे थे उन्हें
आज जमीं पर गिरा दिया मैंने।।

Leave a Reply