होली–‘गीत’

आयो मज़ा रे बड़ा, होली में.… होली में ।
गोरी के ढंग देखे, होली में ।।
आयो मज़ा रे बड़ा, होली में.….होली में।
चोली पै रंग देखे, होली में ।

(१)

बार-बार बो लचक-लचक के,
मटक-मटक के आवे ।
नयन चलावे, भोँहि मटकावे,
मन मेरा तरसावे ।।
मैं जाऊँ जो पास तो गोरी …,
भागि दूरि कों जावे ।
फिर क्या किया……..?
मरी पिचकारी मैंने, चोली में.…चोली में ।
आयो मज़ा रे बड़ा, होली में ।।

(२)

चहरे पर से रंग उतर कर,
जब सीने पर आवे ।
गोरी की चोली के ऊपर,
इंद्रधनुष बनि जावे ।।
रंग लपेटा खाय बदन पर……….,
नाभि भरि-भरि जावे ।
फिर क्या किया………?
रंग लगाय गई, होली में,.…… होली में।
आयो मज़ा रे बड़ा, होली में।।

(3)

एक बार गोरी हौले से,
पास हमारे आई ।
मादक अंग लवो पर शोले,
ता ऊपर अंगड़ाई ।।
भूल गया मैं अपने-आपको …….,
तन जागी तरुणाई ।
फिर क्या किया…….?
पकड़ी कलाई मैंने, होली में.… होली में।
आयो मज़ा रे बड़ा, होली में ।।

(4)

तनिक देर भई, जोरा-जोरी,
मैंने वाहं मरोरी।
झुकी नज़रिया खुली किवरिया,
नैन भए चित-चोरी ।।
रितु बसंत सी खिली बदन पर ……,
हया से मरिगयी गोरी ।
फिर क्या किया………?
अंग लिपटिगई, होली में……. होली में।
आयो मज़ा रे बड़ा, होली में ।।

(5)

धरा समान पसरिगई गोरी,
मैं अम्बर बनि छायो।
हम दोनों के बीच में आँचल,
बादल बनि कर आयो ।।
आँचल उड़ा, हटा यूं बादल ……….,
चहरा-चाँद दिखायो।
फिर क्याकिया…….?
समा गया रे मैं, गोरी में ……. गोरी में,
आयो मज़ा रे बड़ा, होली में I

(6)

होली तो होली में कड़ीगयी,
गोरी चड़ीगयी मन में।
इश्क की ऐसी हवा चली,
अब धूलि उडी गलियन में।।
कैई जतन करूँ मलि-मलि तन धोऊँ,
छूटे दाग न मन में।
फिर क्या हुआ ?
दिल दे वेठा होली में…….होली में।
आयो मज़ा रे बड़ा,होली में ।।

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