भारत देखो लुटगईं-भारत की नारियाँ

(१)

अपने ही घर में मिटगईं , सिंदूर लालियाँ !

भारत देखो लुटगईं, भारत की नारियाँ !!
बेटा मरा आगे पड़ा, माँ ता न रो सकी !
अंतिम समय वो लाल को, गोदी न ले सकी !!

भय से हैं माँ के मुख पर, मुस्कान जारियाँ !

भारत में देखो ………….!!
(२)
वे मोत भाई मर गए, दुष्टो के हाथ से !
बहनों की आवरू लूटी, भ्रष्टों के हाथ से !!
भाई कर से टूटतीं, बहनों की राखियाँ !
भारत में देखो …………!!

(३)
निर्वश्त्र माँ भू पर पड़ी, हर घर के रास्ते !
मासूम छाती चूसते, पीने के वास्ते !!
पर खून से लथ-पथ पड़ी,उस माँ की छातियाँ !
भारत में देखो ……….!!
(४)
नेता सभी ‘गीदड, हुये, शीशे में जा छिपे !
शान्ति और संयम रखो, अंदर से बोलते !!
कैसे मिटेंगीं देश से, खूनीं कहानियाँ !
भारत में देखो …………………!!
(५)
भयभीत लोग होगये, आतंकवाद से !
हर रोज कत्ल होरहे, नेता के हाथ से !!
पकड़ी नहीं जातीं कभी, खादी बर्दियाँ !
भारत में देखो …………………!!
(६)
बापू तेरे देश के क्या, हाल हो गये !
भारत के लाल देखलो, भारत में खो गये !!
पिता के कांधे पर सजीं, पूत्रों की अर्थियाँ !
भारत में देखो ……………..!!

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