गधा पंजीरी खाय रहे हैं

आज के शासन में देखो,
‘मूरख’ राज विराज रहे हैं I

हंस तो नीव की ईट बने,
स्वान ‘कंगूरों’ पै चड़ीगए हैंII

‘कोयल’ के स्वर कौंन सुने,
अव कागा कीरति गाय रहे हैंI

वाहरी प्रजा तेरे तंत्र के जोर सौं,
गधा ‘पंजीरी’ खाय रहे हैं II

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  1. Mukesh Sharma Mukesh Sharma 02/10/2014

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