श्राप नही वरदान है बेटी

श्राप नही वरदान है बेटी
हर घर का अरमान है बेटी
मंदिर है वो घर जन्हा जन्मे बेटी
सुनसान लगता है घर बिन तेरे बेटी
माँ का सुख या बहन का प्यार हो
बाबुल का सम्मान है बेटी
अर्धांग्नी बन घर को पूर्ण बनती है बेटी
बेटी न होंगी तो कैसे जन्मेंगे बेटे
कैसे बजेगी घर घर बधाई,
कैसे सजेंगे घर में सेहरा,
किस घर आएँगी दुल्हनिया,
कैसे घर की बनेगी रौनक,
आँगन में किलकारी का राज है बेटी.
श्राप नही वरदान है बेटी
हर घर का अरमान है बेटी

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