मैं नदिया हूं,

मैं नदिया हूं,

चुलबुली आज़ाद,
निराली हूं.

ज़मीन पर रहकर,
आसमान को समाती हूं.

मन आए तो,
सबको सताती हूं.

मुझसे खुशियां,
मुझसे ही दुख.

लहराती हूं फिर भी,
उड़ नहीं पाती हूं.

मन आए तो,
राह बदलती हूं

सागर की तरह नहीं,
जो राह बदल न सके.

मैं नदिया हूं.

3 Comments

  1. Mukesh Sharma Mukesh Sharma 02/10/2014
  2. Neelkamal Vaishnaw 24/10/2014
  3. neeraj 25/10/2014

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