तेरे शहर को अब भुलाने लगा हूँ

सिमाना खिंच के जाने लगा हूँ
लक्षमण रेखा बनाने लगा हूँ
दिल को अभी से मनाने लगा हूँ
तेरे शहर को अब भुलाने लगा हूँ

न कोई सिकवा न कोई शिकायत
न लेना न देना न कोई इनायत
हुई गलतियां मै बताने लगा हूँ
तेरे शहर को अब भुलाने लगा हूँ

यादें सभी ले जावो उठाकर
खुद खुस रहो मुझे तुम सता कर
बेवफा हो गई क्यों जानने लगा हूँ
तेरे शहर को अब भुलाने लगा हूँ

अपनि घरौंदे बनाके तुम बैठो
फूलों कि शैया सजा के तुम बैठो
अपने लिए काटें सजाने लगा हूँ
तेरे शहर को अब भुलाने लगा हूँ

हरि पौडेल
नेदरलैंड
२२-०३-२०१४

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  1. soni 01/10/2014

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