गुजारिश

एक सदा वो मेरि भी सुने,
गुफ्तगु करना ह्मे भी आता हे॥
आये वो कभी मुझसे भी मिलने,
मिलना भिछड्ना हमे भी आता हे॥

चल कर जाउ चांद हे जहा तक,
खव्यिशो मे जिना हमे भी आता हे॥
छुपाऊ उसे आगोश मे अपने,
बाहे फेलाना हमे भी आता हे॥

दिल नहि मेरा पत्थर का जालिम,
दर्द को समझना हमे भी आता हे॥
सताकर रूलाना पल भर के लिये,
फिर हसाकर मनाना हमे भी आता हे॥

मंजिल तक देदे वो साथ मेरा,
हमदर्द बनाना हमे भी आता हे॥
कोई कहे हमे हमसे भी दिल लगा के देखे,
दिल को धडकाना हमे भी आता हे॥

दुनिया केहती हे …..
“मोहोबत की आग मे रखता हे जो कदम,
वो आखरी सांस तक जल जाता हे……॥॥॥॥।

सून लो ए दुनिया वलो…..
“दिल जो दिया हे, तो इश्क़ कर के रहेन्गे,
क़्यु के……
आग को बुझना ओर इश्क़ मे जल जना हमे भी आता हे ॥॥॥॥

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– संदीप जगताप

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