रिश्ते

रिश्ते

मेरे रिश्ते
रिसते-रिसते
अजाने
पैरों पर
खड़े हो गए
अब
जब चाहें
जहां चाहें
चल पड़ते है
अपने आप |
मैं
थक-हार
कर रहा इंतजार
उनके थक जाने का
लौट आने का

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