फकीरी राग

फकीरी राग

उस दिन –
जब –
आसमानी आग
प्रचण्ड हवा निगल
नव-निधियों संग
उगी थी
धरा जल में
उस दिन –
जब –
दसवीं सिद्धि ने
बनाया था
सृष्टि कुबेर

उस दिन
मैं था
दाता –
खुशियों का / मंगल का
किन्तु
वक्त ने
लूट ली
फिंजा / आँगन
जल / कागज की कश्ती
मिट्टी के महल
आसमां सी आग
तिनकों की शहनाई
सब कुछ |
किन्तु
जीवन इकतारा
गृहस्थ ताण्डव में
अब भी
गाता तो है
फकीरी राग |