तुम चाहो

दुनिया के मेले को हम छोड़ आये हैं
तेरी यादों को तनहा छोड़ आये हैं
बीत जाए सकूँ से जो वो अच्छी
वरना तो जीने की तमन्ना
हम कब के छोड़ आये हैं

तुम चाहो तो निभा लो
दुश्मनी शिदत से
हम तो जमाने से
दोस्ती निभाते आये हैं

देख लेंगे फिर
जमाने का रंग बदलना
वरना तो हम कब के
रंगों से रिस्ता तोड़ आये हैं

2 Comments

  1. Vivekanand 24/09/2014
    • deshbandhu deshbandhu 29/09/2014

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