गजल -मुहब्बत की बदली है ताबीर देखो |

मुहब्बत की’ बदली है’ ताबीर देखो |
मिटा कोई रांझा हँसी हीर देखो ||

हुए जख्म दिल पर हैं’ गंभीर देखो |
न तरकश दिखा ना दिखा तीर देखो ||

बहुत खूबसूरत अगर हो’ हसींना ?
न तुम हुस्न देखो न तस्वीर देखो ||

पटाया मुझे फिर पटाखा बनाया |
फटा दिल मे’रा उनकी’ तहरीर देखो ||

निगाहों में खंजर छुपा के वो’ रखते |
चलाई नजर याकि शमशीर देखो ||

नजर का नजारा बना था दुधारा |
नजर से ही’ मारा जिगर पीर देखो ||

नया कातिलों ने हुनर है’ निकाला |
खिलाई मुझे पीर की खीर देखो ||

बहुत कातिलाना अदायें हैं’ उनकी |
वो’ रखते हैं’ जुल्फों में जंजीर देखो ||

शिकारी बनीं जाने’जाँ बेहुनर की |
लगा तीर फिर भी बचा वीर देखो ||

न कल कल मुझे थी न कल आज मुझको |
न कल कल मिलेगी ये’ तकदीर देखो ||

नही शिव झुका है न झुकता कभी है |
जगा दर्द है आंख में नीर देखो ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
9412224548

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