तानाशाह हमारी नींद से डरता है

तानाशाह के
खखारने से नहीं डरती
उसके गुण गाने वाले
सबसे बुरे दिनों की कहानियाँ
सुनाते हैं
और थक जाते हैं ।
हमारा जीवन
दिन भर एक यातना शिविर है
हम दिन भर के श्रम से
जब थक जाते हैं
एक क्रांतिकारी नींद
हमें आगोश में ले लेती है ।
हमारी निर्भीक नींद में
तानाशाह का कोई खलल नहीं ।
हमें प्यार है पत्नी से
हमारे बच्चे हैं जिनकी
जरूरत है रोटियाँ
फिर भी हमारी नींद
अच्छे दिनों का ख्वाब
ढोती है
और बिना डरे
पूरा होती है ।
दूसरे दिन साईकिल की घंटियाँ
एलान करती गुजरती है सङकों से
एक पूरी नींद के बाद
फिर पूरे दिन का श्रम
तानाशाह हमारी नींद से डरता है ।

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