डुबोना गम शराब की

1-॰
डुबोना गम शराब की
आदत है लेकिन,
उतरके दिलों में
कहाँ डूबती शराब?

2-
पहल मेरी को
कब समझा हुजूर ने,
हादसों की बात में
बारात का मंजर।

3-
ढ़हने लगी दीवार जब
तब कहा उसने,
हमसे कहो हालिया
कोई बयां अपना?

4-
तेरा तकाज़ा फिर वही
फिर वही हमारी माँग,
आशिकोँ की बात हर
इश्क का पैबंद।

5-
दवा,दिल जाँच कर लेना
कहीं ना डेट निकली हो,
मुनाफा हो न हो जिससे
लगाई आग पिछली हो।

6-
जानता हूँ मैं तेरी
ख्वाहिश तेरी उम्र,
कुफ्र तो कहता नहीं
बर्बाद होने को।

7-
नहीं गर पास में पैसा
तकाज़ा फिर कहाँ कोई,
बदलकर कनखियां भी
कब भला वो बात करते हैं?

8-
वो लिखेगा क्या गजल
जिसका न कोई दाम,
तार में गठजोड़ का
बेतुका पैबंद।

9-
बंदिश न थी निगाह पे
लहजा रहा शुमार,
आरजू में मांगना
माँगने का क्या?

10-
जा लगी जिस दिन मेरी
ये नजर उनसे,
परेशां दीदार को
तब से रहा फ़कीर।

11-
देखकर मुझसे कहो
क्या कहा होगा,
इश्क के इजहार में
लफ्ज का क्या काम?

12-
बयां करूँ मुफ़लिसी का कैसे,
न हाल पूछे जिन्दगी का कोई।

lekhakmukeshsharma@gmail.com/9910198419

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