स्त्री विविधता

1-
समाधान की ओर करें अब,
आओ मिलकर हम प्रस्थान,
संचालित सुलभ क्रियाओं के संग,
भावी पीढ़ी को वरदान।

2-
अल्हड़ नदी की तरह बाबरी,
निकली बनके बयार कोई,
ताण्डव तो था स्वयं प्रकाशित,
लांघ गया संसार कोई।

3-
मान और अपमान को जानो,
जानो अपने घर का हाल,
इश्क जगत में बहुत जरूरी,
पर क्या मात-पिता बेहाल?

4-
गैरों से शिकवा करना क्या,
गैरों से लड़ना झगड़ना क्या,
अपनों ने विषपान कराया,
गैरों का छलना धोखा क्या?

5-
गलती करता इंसा ही है,
पछतावा करता इंसा ही है,
गलती करके जो इठलाए,
वो बात बिगाड़ा इंसा ही है।

6-
इतना अंधा पति न तुम्हारा,
संस्कारों से लंगड़ी सास नहीं,
गैर मर्द की बाँहों में तुम,
भूलीं थीं विश्वास कहीं?

7-
दुनियां दीवानी हो गई,
नारी की जवानी सो गई,
बुलबुला उठने से पहले,
आग पानी हो गई।

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