तवा,टोकना बहता डोले

1-
तवा,टोकना बहता डोले
बही भागवत,गीता,
मार छलांग कुरआन बही
बाइबिल के संग मीता,
रोती-रोती नार मुँह से
रो-रोकर कुछ बोले,
सिंहर उठे सुन लहर’सुनामी’
पगलाई सी डोले।

2-
रोजगार देता था जिनको
साथ ले गया पल में,
क्षत-विक्षत कर गया उन्हीं को
स्रष्टि की इस जंग में,
खोकर अपने पुत्र-पुत्री
अब भी वहीं खड़े हैं,
पास न इनके खेतीबाड़ी
मौत से खूब लड़े हैं।
3-
खामोश था मैं
वास्ता जिन्दगी का देकर,
शैतान न चूका
कत्ल करने से गर्दन,
होकर जुदा जिस्म से
किया रूह ने नज़्ज़ारा,
जन्नत में भीख रहम की
माँग रहा था वतन।

4-
मक्तूल हूँ दुनियां का
क्या गजब होगा,
तश्कीक में बांधेगी दुनियां
क्या सितम होगा,
चलाचल तू कारवाँ
मुफ़लिसी का लेकर,
वर्ना सितम तलवार का
क्या कम होगा?

5-
नजर मिली भी नहीं कि
हटा ली मैंने,
तसल्ली को कुछ वक्त
जमा ली मैंने,
जब पलटती है तू
गुजरता है गुमां,
कि उंगली मूंछ पर
घुमा ली मैंने।

lekhakmukeshsharma@gmail.com/9910198419

Leave a Reply