औरत के आँसुओं में

1-
औरत के आंसुओं मेँ
प्यार की झन्कार होती है,
उसके इंकार में इकरार की
दरकार होती है,
दर-दर खोजता है आदमी
बरसात का बादल,
अपनी नदी कब आदमी से
पार होती है?

2-
की बात वफ़ा की
तो बेवफ़ा न कह,
दिल रखा है कि मुद्दत से
कफन के लिए,
गिला कुदरत का
फरिश्तों को भी नहीं,
क्या बेवफ़ा नहीं होते
अंजुमन के लिए?

3-
छोड़कर महबूब मुझको
रामजाने किधर गई,
जिन्दगी अल्फ़ाज की
जिस तरह मुकर गई,
खोजता हूँ भेष मेरा
है फ़कीरों की तरह,
ख्वाब में आकर मिली ओ
ख्वाब में मुकर गई।

4-
मेरी मदफ़न पे
अस्थियां बेचने वालो,
कब करोगे सौदा
नकीरैन का कहो?
और गुर्बत से न देखो
जल्वा-ए-रंग-ए-हुस्न,
कभी बयां सिसकते
सुख-चैन का कहो।

5-
इश्क जुबां पे अश्क
निगाहों में कैद,
हो रहा है समन्दर
दो बाँहों में कैद,
मिलती है दरिया तो
बनती है समन्दर
हो रही है औरत क्यों
आहों में कैद?

शब्दार्थ-
1-मदफ़न/कब्र
2-नकीरैन/कब्र में हालचाल पूछने वाले

lekhakmukeshsharma@gmail.com/9910198419

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