हे प्रभु या जगत में

1-
हे प्रभू या जगत में
मैँ अरु तू का खेल,
तू का कर उद्धार प्रभु
मैं को दे तू धकेल,
मैं बकरी की ना रही
मैं बालक नादान,
तू का सारा खेल है
तू मेँ है भगवान।

2-
हमारा हाल ही अच्छा
न हमारी चाल ही अच्छी,
खिंच रही है पेट की
हर खाल ही अच्छी,
बयां करूँ किस तरह
मुफ़लिसी का सितम,
हो रही है दरम्यां
हर बात ही अच्छी।

3-
गर्दिशों के दिन
निकल जाने दो दोस्त,
तब देखेंगे बुलंदियां
शौहरत की हम भी,
वो क्या लगाते हैं खिज़ाब
मूंछों पर अपनी
कभी झालर से सजायेंगे
ये मूंछें हम भी।

4-
ये जमाना भी कैसा
बेपीर है दोस्तो,
धक्का लगाने की कहकर
देखो हमीं को,
माँ कोई खुदा
कहता है जमीं को
खुद चला जाता है
छोड़कर हमीं को।

5-
अफ़साना-ए-इश्क ने
गमे-शैलाब से पूछा,
बता अपनी रजामंदी
कहे तो हाँ कर दूँ,
गम बोला-क्या हो गई
नफरत दुनियां से?
तू कहे तो मैं अकेला
जिन्दगी दुश्वार कर दूँ।

lekhakmukeshsharma@gmail.com/9910198419

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