मैं हूँ बेवफ़ा तू

1-॰
मैं हूँ बेवफ़ा तू
वफ़ादार क्यूँ है,
मयपरस्ती में मेरी
गुनेहगार क्यूँ है?
जो उठाते हैं कसम
कलेजा उनका,
कैद में किसी की
गिरफ्तार क्यूँ है?

2-
बहुत हैं मेरे साथ
मेरे अपने,
कुछ हकीकत में लुटे
कुछ के सपने,
कुछ लुटने को
बेताब खड़े हैं,
औलाद के लिए
माँ-बाप अपने।

3-
क्या करूँ आके तेरे घर
गमे-रोजगार न हुआ,
क़ाफ़िर तो पहले ही था
मैं होशियार न हुआ,
कर रहा है तकाज़ा
मलक-उल-मौत मुझसे,
वफादारी को मेरी
तेरा ऐतबार न हुआ।

4-
तमन्ना मुझसे मिलने की
या कि कुछ आगे,
खयाल मेरा खयाल है
या कि कुछ आगे,
पलटता रहा पन्ने अगर
किताब की तरह,
कहना पड़ेगा बदतमीज
या कि कुछ आगे।

5-
हसरत मेरी कि
जा मिलूं बाँधकर रफ्तार,
सोचा सनम सो रही
बंद दरो-दीवार,
गैर है अब तक मेरे
हर दीद का रिश्ता
जब तक उठाके बाजुएं
कह न दें वो प्यार।

lekhakmukeshsharma@gmail.com

Leave a Reply