जिंदगी का दिया

जिंदगी बस एक बोझ बन गया,
और
इस बोझको ढोना ही है
जीनेका एक बहाना के लिए,
किसीके लिए होगी
चमन की खुशबु
बहारों की रोशनी,
मेरे लिए तो बस गन्दगी भरी
एक अन्धेरा कुँवा है,
बिना मंजिल की
एक टेड़ा रास्ता है
जहाँ मुझे चलने की
मज़बूरी है,
इस भीड़ में भी अकेला हूँ,
और
मेरा पीछा कर रहा है
एक चीखता हुवा सन्नाटा,
अब इस धिपधिपाते दिए की
बस इन्तजार है
बुझ्नेका!!

हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड
१०-०९-२०१४

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