गजल

कभी तुमने अपने अंदर झाँक कर देखा ?
बाहर बने हो बड़ा बन्दर झाँक कर देखा ?

डूबने के लिए तुम किधर किधर फिरते हो
आँखों में भरी समंदर झाँक कर देखा ?

माँगते हो खुदा से अपने दोनों हाथ फैलाकर
तुम खुद हो एक सिकंदर झाँक कर देखा ?

ख्वाबो में लिए बैठे हो सात समुन्दर जानेको
अपना देश ही कितनी सुन्दर झाँक कर देखा ?

साधू सन्त बनते हो लोभ मोह में फसे हो
होगे तुम कैसे मस्त कलंदर झाँक कर देखा ?

हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड
०३-०९-२०१४

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